Friday, 11 September 2015

**********************भूल न जाना तुम*************************
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खुद की झोली भरना हरदम ही जिनको याद रहा ,
उनको उनकी इस गलती का एहसास करना भूल न जाना तुम. 

जिन् लोगों ने आंका तुमको खुद से ज्यादा कमतर ,
उनकी इस गलती को  सबके सामने लाना भूल न जाना तुम। 

करके बादा  तुमसे झूठा  सो गए लात तानकर जो ,
उनको याद दिलाना यारो  उनकी नानी को भूल न जाना तुम। 

जब भी आये  पास तुम्हारे ऐसा कोई भी एक जन ,
सबसे  पहले उसको उसकी  औकात दिखाना भूल  जाना तुम। 

कहना उसको मुश्किल में जो साथ रहा उसके साथ में हम,
अपने ज़िंदा होने का उसको जमकर  एहसास करना भूल न जाना तुम.

अब तक जिन लोगों ने समझा तुमको गूंगा औ बहरा ,
अपनी जोशीली वाणी का उनको  अहसास करना भूल न जाना तुम।  


-------------------------------------------------रमाकांत बड़ारया  दुर्ग ------

Ramakant Badarya BETAB:

Ramakant Badarya**********************भूल न जाना तुम*************************

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खुद की झोली भरना हरदम ही जिनको याद रहा ,
उनको उनकी इस गलती का एहसास करना भूल न जाना तुम. 

जिन् लोगों ने आंका तुमको खुद से ज्यादा कमतर ,
उनकी इस गलती को  सबके सामने लाना भूल न जाना तुम। 

करके बादा  तुमसे झूठा  सो गए लात तानकर जो ,
उनको याद दिलाना यारो  उनकी नानी को भूल न जाना तुम। 

जब भी आये  पास तुम्हारे ऐसा कोई भी एक जन ,
सबसे  पहले उसको उसकी  औकात दिखाना भूल  जाना तुम। 

कहना उसको मुश्किल में जो साथ रहा उसके साथ में हम,
अपने ज़िंदा होने का उसको जमकर  एहसास करना भूल न जाना तुम.

अब तक जिन लोगों ने समझा तुमको गूंगा औ बहरा ,
अपनी जोशीली वाणी का उनको  अहसास करना भूल न जाना तुम।  


-------------------------------------------------रमाकांत बड़ारया  दुर्ग ------

 BETAB:

Saturday, 27 December 2014

*********आईना हूँ मैं ***********
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जिंदगी में जिनकी कोई गम नहीं गिला नहीं
सच   मानिये  वो  कभी फूला नहीं फला  नहीं
हँसकर बिताये हैं हमने जिंदगी मैं हर एक पल
बिन हमारे महफ़िल का एक भी दौर चला नहीं 

Thursday, 25 December 2014


**बिन हमारे -----!!**
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 जिंदगी में जिनकी कोइ
गम नहीं गिला नहीं।
 सच मानिये वो कभी
 फूला नहीं फला नहीं।
 हंसकर बिताये हैं हमने
 जिन्दगी के हर एक पल ,
 बिन हमारे महफ़िल का
 एक भी दौर चला नहीं -
-------------------रमाकांत बड़ारया "बेताब" -दुर्ग
__________लगता है ________!!!
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ज़माने  से  गुज़रा  हुआ  वक़्त लगता है,
हताश और थका हुआ मुसाफिर लगता है। 

पेड़  से  गिरा  पका  हुआ  इक  फल लगता है, 
नज़रों से मासूका के गिरा हुआ प्रेमी लगता है। 

कहने को जिनके पास रहा  अब कुछ भी नहीं 
कुर्सी पर जमाने  कब्जा बड़ा उतावला लगता है। 

दिखने  मैं  तो  बड़ा  ही  मासूम  जो  लगता है,
छुरी बगल मैं अपने मुंह मैं वही राम रखता है।  

Friday, 14 October 2011


HARSH: HARSH: HARSH: वैतागवाड़ी: कुछ कांच हैं, कोई आईना.....

HARSH: HARSH: HARSH: वैतागवाड़ी: कुछ कांच हैं, कोई आईना.....: HARSH: HARSH: वैतागवाड़ी: कुछ कांच हैं, कोई आईना... : HARSH: वैतागवाड़ी: कुछ कांच हैं, कोई आईना... : वैतागवाड़ी: कुछ कांच हैं, कोई आईना...