Saturday, 27 December 2014

*********आईना हूँ मैं ***********
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जिंदगी में जिनकी कोई गम नहीं गिला नहीं
सच   मानिये  वो  कभी फूला नहीं फला  नहीं
हँसकर बिताये हैं हमने जिंदगी मैं हर एक पल
बिन हमारे महफ़िल का एक भी दौर चला नहीं 

Thursday, 25 December 2014


**बिन हमारे -----!!**
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 जिंदगी में जिनकी कोइ
गम नहीं गिला नहीं।
 सच मानिये वो कभी
 फूला नहीं फला नहीं।
 हंसकर बिताये हैं हमने
 जिन्दगी के हर एक पल ,
 बिन हमारे महफ़िल का
 एक भी दौर चला नहीं -
-------------------रमाकांत बड़ारया "बेताब" -दुर्ग
__________लगता है ________!!!
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ज़माने  से  गुज़रा  हुआ  वक़्त लगता है,
हताश और थका हुआ मुसाफिर लगता है। 

पेड़  से  गिरा  पका  हुआ  इक  फल लगता है, 
नज़रों से मासूका के गिरा हुआ प्रेमी लगता है। 

कहने को जिनके पास रहा  अब कुछ भी नहीं 
कुर्सी पर जमाने  कब्जा बड़ा उतावला लगता है। 

दिखने  मैं  तो  बड़ा  ही  मासूम  जो  लगता है,
छुरी बगल मैं अपने मुंह मैं वही राम रखता है।